
रेल में "कुचरणी" कविता-संग्रह का लोकार्पण
कालीबंगा: एक चित्र इन ईंटों के ठीक बीच में पड़ी यह काली मिट्टी नहीं राख है चूल्हे की जो चेतन थी कभी चूल्हे पर खदबद पकता था खीचड़ा कुछ हाथ थे जो परोसते थे। इसी सीरीज की अन्य कविताओं को पढ़े... "कविता-कोश" में या देखें एक साथ २१ कविताएं "कृत्या" में.... और कुछ सवालों के जबाब देखिए "कांकड" पर |
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