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सोमवार, मई 31, 2010

कालीबंगा: कुछ चित्र-1 / ओम पुरोहित कागद









रेल में "कुचरणी" कविता-संग्रह का लोकार्पण

कालीबंगा: एक चित्र

इन ईंटों के
ठीक बीच में पड़ी
यह काली मिट्टी नहीं
राख है चूल्हे की
जो चेतन थी कभी

चूल्हे पर
खदबद पकता था
खीचड़ा
कुछ हाथ थे
जो परोसते थे।

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