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रविवार, अप्रैल 13, 2014

*मृत्यु : पांच हाइकु*

1.
दृश्यमान था
जगत से ओझल
कथ दी मृत्यु !
2.
चलाचली में
रुकना चल कर 
यात्रा अंतिम !
3.
मुख से हटा
नाम का उच्चारण
कह दी मृत्यु !
4.
घर में लौटी
जब केवल काया
मान ली मृत्यु !
5.
सब पुकारें
बोली जब ना देह
मृत्यु ही बोली !

गुरुवार, अप्रैल 10, 2014

पांच हाइकु

1.
खोया हमनें
हथियाया जग ने
बिलोया थूक !
*
2.
बातें अपनी
देता शब्द जगत
बना तमाशा !
*
3.
मेरे खातिर
पाली तुमनें प्रीत
जग पागल !
*
4.
घट अघट
सब अपने बीच
बातें पसरी !
*
5.
काग उडाया
आए ना कभी तुम
हंसी दुनिया !

गुरुवार, जून 20, 2013

* सपनों के हाइकु *

1.
देखे सपना
हम को छल कर
आंख हमारी ।
2.
देखें सपना
पड़े पलंग पर
नींद तो आए ।
3.
बांटे सपने
रख ली सारी नींद
देखते कैसे !
4.
टूटी खटिया
टूटी टूटी सी नींद
टूटे सपने !
5.
अपनी नींद
पराए थे सपने
आंखों बाहर !

शुक्रवार, मार्च 29, 2013

* सपनों के हाइकु *

1.
देखे सपना
हम को छल कर
आंख हमारी ।
2.
देखें सपना
पड़े पलंग पर
नींद तो आए ।
3.
बांटे सपने
रख ली सारी नींद
देखते कैसे !
4.
टूटी खटिया
टूटी टूटी सी नींद
टूटे सपने !
5.
अपनी नींद
पराए थे सपने
आंखों बाहर !

2-हाइकु,

1.
कैसे चढ़ता
रंग चटख लाल
चेहरे काले ।
2.
तन उजले
मन काले कोटर
रंग में भंग ।

गुरुवार, मई 24, 2012

पंद्रह हाइकु

हाइकु ही हाइकु
===========


1.
मन की बात
मन से बोला मन
हो गई प्रीत !
2.
खुली आंख में
बही नदी प्रीत की
डूबे प्रीतम !
3.
उघाड़ी आंख
टपक गया आंसू
हो गई प्रीत !
4.
तनहाई में
खिल आई मुस्कान
छलकी प्रीत !
5.
भाए दर्पण
भोजन-पानी छूटे
बहकी प्रीत !
6.
डालते रंग
लाल-पीला-नारंगी
भीतर काला ।
7.
मन चंचल
चलाए पिचकारी
बोलते रंग ।
8.
उजला तन
मन मे मलीनता
खेलो होली ।
9.
दिखते अंग
भूले रंग सकल
होली तो हो ली ।
10.
डालते रंग
रंग में है भंग
चेहरे फीके ।
11.
उड़ती देख
चेहरों की रंगत
खुद को छोड़ !
12.
जिंदा आदमी
मुरदे सा भटके
करो मातम !
13.
चले बाजार
भर थैले में नोट
मिलेगा आटा ?
14.
मंदिर में जा
बन गया देवता
था तो पत्थर !
15.
रोटी महंगी
घर नहीं पकती
कपड़ा दूर !

o
ओम पुरोहित"कागद"
24-दुर्गा कोलोनी
हनुमानगढ़ संगम-335512
[ राजस्थान ]