चलते हुए लड़खड़ाने लगे हैं ।
नींद में भी बड़बड़ाने लगे हैं ।
ये मोहब्बत का ही असर है यार ।
नुस्ख़े नाहक आजमाने लगे हैं ।।
नींद में भी बड़बड़ाने लगे हैं ।
ये मोहब्बत का ही असर है यार ।
नुस्ख़े नाहक आजमाने लगे हैं ।।
मेरे घर के ठीक सामने से
शब्द ही था
आप
दम तोड़ती सड़क के किनारे
ऊपर उठे-तने
अनन्त काल से
उपक्रम चाहे पंखों का है
तूं जनमा मैं बलिहारी बेटा।
शाख पर साथ रहे