रविवार, जून 20, 2010

ओम पुरोहित कागद की राजस्थानी व्यंग्य कविताएं

ओम पुरोहित ’कागद’ की राजस्थानी व्यंग्य कविताएं

चाळीस कुचरणीं

नेता चाळिसो

१.
सो गावां री
बाजरी खाई
साठ गांवां रो लूण
नेता जी घूमै
ज्यूं कूवै रो भूण !
२.
घर में आठ रा
बा’रनै साठ रा
नेता जी बणग्या बाप
राम जाणै बां नै
कद लागसी पाप !
३.
पोतडिया
थाणै में सूकै
नेताजी
मंचां माथै भासण देवै
जाणै दूध सारू
टाबरियो कूकै !
४.
नेताजी देवै
भासण साफ़
ढीली पड्गी
भलांई राफ़ !
५.
नेताजी रो
कुण सग्गो
जको बणै
बो खावै
सै सूं पै’ली
तगडो दग्गो !
६.
नेताजी रा
च्यार भाई
स्टोरिया
ब्लैकिया
स्मगलर
अर सिपाई !
७.
नेताजी करावै
सगळां सूं चाकरी
दिल्ली जाय’र
चिन्ता कोनी करै
कीं री ई डाक री !
८.
नेताजी खस्सै
भासण नैं
जनता तरसै
रासण नैं !
९.
नेताजी री
जनता में
नीं गळै दाळ
संसद में जाय"र
काढै
भूंडी गाळ !
१०.
नेताजी
कीं नै ई
नीं जाण देवै
बोटां सारु
भैंस नैं ई
ब्याण देवै !
११.
नेताजी
कीं री पूरी
मांग करै
बै तो खुद आपरी
भोत दोरी
उंची टांग करै !
१२.
नेताजी में
सिफ़तां मोकळी
ताबै आयां
बगतै नैं ई
दे ज्यावै ढोकळी !
१३.
नेताजी राखै
एक चेलो
जको
भरतो रै’वै
नोटां सूं थैलो !
१४.
नेताजी
हारतां ई
बण जावै गंद
पांच साल ताईं
करावै बजार बंद !
१५.
नेताजी रो
ओ एलान
नोटां री माळा
म्हारै गळै
दूर राखो भान !
१६.
नेताजी जद
हांसै कूडी हांसी
समझल्यो
चढसी कोई फ़ांसी !
१७.
नेताजी नैं
चौखा लागै
गांव में सरपंच
अर
सै’र में मंच !
१८.
नेताजी नैं
भावै
बोटर भोळो
अर
संसद में रोळो !
१९.
नेताजी
घणा भोळा
बोलै ई कोनीं
भलांई
कित्ता’ई देवो
नोटां रा झोळा !
२०.
नेताजी
आलाकमान सूं
टिगट मांगै
जे गाडी में
टी.टी. टिगट मांगै
तो बै बीं नैं
चालती गाडी में
फ़ांसी टांगै !
२१.
नेताजी डरै
खाली हारण सूं
बाकी तो बै
कद डरै
सागी मा नै भी
मारण सूं !
२२.
नेताजी रा
दाळ-भात
दळ बदळ
अर
पीठघात !
२३.
नेताजी
कर सकै
बलात्कार
जे बां नैं नीं हुवै
बोटां री दरकार !
२४.
नेताजी बोल्या
परनै हू ए गावडी
कीं म्हांनै ई
चरण दे डावडी !
२५.
नेताजी रै
छप्पन रोग
जीत्यां ई
हुवै निरोग
के जाणै बापडा
भोळा लोग !
२६.
नेताजी
कद बणै मोडा
जे बण जावै
तो फ़ोड न्हाखै
देवतावां रा गोडा !
२७.
नेताजी बोल्या
जनता री तकलीफ़ां
दूर करण रो
म्हैं ले लियो ठेको
अब तो म्हांनै
बोटडा टेको !
२८.
नेताजी बोल्या
जे म्हे नीं हुआं
कुण थूकै
कुण चाटै
अर म्हारै बिनां
एक ई पुळ रै
उदघाटण रो फ़ीतौ
बार-बार कुण काटै !
२९.
नेताजी रै
एक ई कळेस
पार्टी तौ बदळ सकै
कीयां बदळै भेस !
३०.
नेताजी
अर अडवै में
इत्तौ ई फ़रक
अडवौ कीं खावै कोनीं
अर नेताजी खांवता
सरमावै कोनीं !
३१.
नेताजी रै
सो कीं पचै
अर
बांरै खायां पछै
कीं नीं बचै !
३२.
नेताजी
देश नैं खा सकै
पण
धोखौ नीं खा सकै !
३३.
नेताजी
सो बार पार्टी बदळै
पण बां रो मन
एक बार भी
नीं बदळै !
३४.
नेताजी रै
सासण में
डीपू आळै
रासण में
खोट ई खोट
सतगुरु तेरी ओट !
३५.
नेताजी
एक दम बेकार
पण चढण नै
चाईजै कार !
३६.
नेताजी रो
दाव
राज रो
न्याव !
३७.
नेताजी रा
कान काच्चा
कद रै’वै
याद वाच्चा !
३८.
नेताजी
रोटी खोसै
पण मांगै बोट
डाकू नै पौखै
धरमी नैं रोसै !
३९.
नेताजी रै
सात दूणी आठ
अर जनता रै
बीस चौका आठ !
४०.
नेताजी
पाळै धरम
पण
धरम माथै चालता
राखै सरम !

19 टिप्‍पणियां:

  1. yadi hindi men arth ka saralikaran hota toh padhana bahut asaan hota .. aanand nahin liya ja sakata . kripaya saral karen .

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  2. भाई साहब कुचरणी तो एक दो ई भारी पड़ जाया करै अर साथै ई चाळीस कर ली. चालो रोज रोज नीं करी एकर ही कर ली... बधाई

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  3. प्रज्ञा जी,
    राजस्थानी मेरी मातृभाषा है और मैँ राजस्थानी मेँ प्राथमिकता से लिखता हूं।हिन्दी राष्ट्रभाषा है इस लिए हिन्दी मेँ भी लिखता हूं।मैँ तो पंजाबी मेँ भी लिखता हूं।सभी भाषाओँ का सम्मान करता हूं क्योँ कि भाषाएं ही परस्पर संवाद का सेतु बनती हैँ।आपको राजस्थानी समझ नहीँ आई क्योँ कि हिन्दी से पृथक संपूर्ण एवम् सशक्त भाषा है।यही हम राजस्थानी लोगोँ को समझाना चाहते हैँ तथा मांग करते हैँ कि इस भाषा को संविधान की आठवीँ अनुसूची मेँ जोड़ा जाए।
    आपको समझने मेँ जो कष्ट हुआ उसके लिए क्षमा ! मैँ इनका हिन्दी अनुवाद भी दे दूंगा।

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  4. समझ तो नही आई लेकिन लगता है आप ने इन कमीने नेताओ को जुते गीले कर के मारे है :) बहुत अच्छा

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  5. om ji , maine bhi aaj NETAON par cartoon banakar netaon ki KUCHARNI ki hai ..

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  6. आदरणीया ओम जी री मीठी-मीठी कुचरणी मन में गुदगुदी रे सागे-सागे आज रै नेतावां माथे व्यंग्य रा बाण भी गुलाब रा फूल लपेट'र मारे है... अ'र नेतावन री असलियत भी बतावे है..पण इण नेतावां री खाल भी गेंडे री खल ने मात देवे ...कित्ती कुचारनी करल्यो..असर ई नी होवे..हाँ, ओम जी सरीखा री कलम री कुचारनी स्यूं नींद तो उड़े ही है आंरी.. इत्ती आछी कुचरणी सारु बधाई सा !

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  7. बाई मस्तान सिँह जी, तुस्सी तां टिप्पणियां दा ढेर ला ता !
    पसंद आई के नीँ ऐ तां लिख्या ई नीँ ? टिप्पणियां करदी वाकी लगदा ऐ के भुल्ल गए ते नेत्यां आळा गुस्सा माऊस राही इत्थे कढ़ लया!
    तुहाडे कार्टून डाढ़े सोणे नेँ!राजस्थान पत्रिका विच्च वी रोज आउंदे ने!बधाई होवे!

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  8. कागद साब,
    नेतावां रै जूती खोल'र ई लारै पड़ग्‍या, कांई कोयी पुरांणी गस है ?
    खैर.... नेतावां रै दोगलै ब्‍यौवार अर बदळतै मिजाज माथै खरी टीप है।

    जद नेतृत्‍व खरो नीं होसी तद ताणी देस रा हाळत बदळण री कल्‍पना ई नीं करीज सकै। नेतावां नै गेलो बुद्धिजीवी वर्ग ई दीखा सकै, जकै मांय साहित्‍यकार भेळो है।

    असली धरम निभायो है आप।

    बधाई।


    -

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  9. वा सा वा...काईं सागोड़ी कुचरनी करी है..
    पण ए नेता भी ठाडा नकटा अर बेसरम है...
    खाज ई मसां चालै..
    पढ़'र जीव सोरो होग्यो..
    कुचर कुचर'र खाडा खोद दिया सा...
    लखदाद आपनै ...
    आभार आपरो

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  10. Om ji,
    Meri smasya bhee yahe hai, ke theme to ptaa chal gya...par pure arth samjh main nahee aye.
    Main aap se puchne hee valee thee ke aap ne jo paheleyan "Shabdon Ka Ujala" ke leye bhajee hain...vo to Punjab ke jeevan ko dekhlatee hain, essa nahee hai ke Punjab ka jeevan kuch aur hai ...aur Rajsthan ka kuch aur.... par phir bhee kuch antar to hota hee hai.....
    Aap to kitnee bhashaen jante ho.....Mubarka ho! hume bhee Rajsthanee ke arth bta do.

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  11. sagla syun pela to parnaam Kagaad Saab..

    baad re mayne Kuchrni pr tippani ..

    sarkar kumar biswas ji ek mehfil mayne keyo ke muhn netaavaan or paakistaan pr kadi kavitaa ni kun ..kyunki mahne lage do kodi re cheez pr karodo rupyeea re kavita kyun barbaad karni ..Or Meh Bhi Ee baat Syun sahmat ho lekin agar be bhi thari kuchrni syun vakif ho ave to sayad mahri daain bara bhi viachar badal javela ...baki maharj juti to lakdhti hi padi hai nettaanva re ...!!

    Aashish Purohit Nohar

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  12. Omsaa,
    thari uper hu teesri baach'r thare
    saage photu khichaba ro jee kare.

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