रविवार, अप्रैल 01, 2012

काफ़िर शरद में

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आया करो
मन मरुस्थल पर
काफ़िर शरद मेँ
मावठ की तरह
झूम कर !

छोड़ शिखर
जिद्द का
नीचे मी
उतरा करो
आया करो चाहे
पर्वतो पर उन्मुक्त
घूम कर !

हम हैं
ख़ला से उतरी
किरण सूरज की
होंगी खुश
पत्तियों पर
बूंद शबनमी
चूम कर !

2 टिप्‍पणियां:

  1. शरद को भी काफ़िर बना दिया...बहुत खूब....

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  2. मन मरूस्थल पर बारिश की तरह झूम कर बुलाने का आह्वान !अति सुंदर !

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