सोमवार, जुलाई 29, 2013

*बारिश*

मरुधरा पर 
बारिश का बरसना
केवल पानी का गिरना नहीँ
बहुत कुछ बंधा है यहां ।

जैसे कि पेड़-पोधोँ की रंगत
मोर का नृत्य


प्रेमी वृंद के
मिलन की चाह
किसान की उम्मीद
सरकारी योजनाएं
बजट की परवाज !

बारिश सोख भी सकती है

कर्ज मेँ आकंठ डूबे नत्थू
अधबूढ़ी कंवारी बिमली के
कई सावन से टपकते आंसू ।

मरुधर जिन्हे
संजोए बैठी है
बारिश की आस मेँ
अंकुरित हो
कुंठित बीज
बचा सकते हैँ
मिटती लाज मरुधर की
बारिश मेँ 

4 टिप्‍पणियां:

  1. मरुधरा पर
    बारिश का बरसना
    केवल पानी का गिरना नहीँ
    बहुत कुछ बंधा है यहां ।

    सही कहा आपने...

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  2. सच है बारिश से ज़िंदगी भी मिलती है और जीवन मिट भी जाता है. बेहद भावपूर्ण रचना, शुभकामनाएँ.

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  3. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति .. आपकी इस रचना के लिंक की प्रविष्टी सोमवार (19.08.2013) को ब्लॉग प्रसारण पर की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें .

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  4. एक दिव्य अनुभूति ....बहुत सुंदर रचना ...!!

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