शुक्रवार, अप्रैल 25, 2014

फिर कविता लिखेँ


आओ
आज फिर कविता लिखें
कविता मेँ लिखेँ
प्रीत की रीत
जो निभ नहीँ पाई
याकि निभाई नहीँ गई !

कविता मेँ आगे
रोटी लिखें
जो बनाई तो गई
मगर खिलाई नहीँ गई !

रोटी के बाद
कफन भर
कपड़ा लिखें
जो ढांप सके
अबला की अस्मत
गरीब की गरीबी !

आओ फिर तो
मकान भी लिख देँ
जिसमेँ सोए कोई
चैन की सांस ले कर
बेघर भी तो
ना मरे कोई !

चलो !
अब लिख ही देँ
सड़कोँ पर अमन
सीमाओँ पर सुलह
सियासत मेँ हया
और
जन जन मेँ ज़मीर !

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना रविवार 27 अप्रेल 2014 को लिंक की जाएगी...............
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  2. लिखना ज़रूरी है -लिखा बिना न चैन पड़ेगा ,न ज़मीर जगेगा !

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