बुधवार, मार्च 10, 2010

ओम पुरोहित ‘कागद’ री कवितावां…..


मा- १
घर मांय बी
निरवाळौ घर
बसायां राखै
म्हारी मा।
दमै सूं
उचाट होयोड़ी
नींद सूं उठ’र
देर रात ताणी
सांवटती रे’वै
आपरी तार-तार होयोड़ी
सुहाग चूनड़ी।
बदळती रे’वै कागद
हरी काट लागियोड़ा
सुहाग कड़लां
रखड़ी-बोरियै-ठुस्सी री
पुड़ी रा
लगै-टगै हर रात।

मा- २
साठ साल पै’ली
आपरै दायजै मांय आई
संदूक नै
आपरी खाट तळै
राख’र सोवै मा।
रेजगारी राखै
तार-तार होयोड़ी सी
जूनी गोथळी मांय
अर फेर बीं नै
सावळ सांवट‘र
राख देवै
जूनी संदूक मांय।
पोती-पोतां सागै
खेलतां-खेलतां
फुरसत मांय कणां ई
काढ’र देवै
आठ आन्ना
मीठी फांक
चूसण सारू।

मा- ३
मुं अंधारै
भागफाटी उठ’र
पै’ली
खुद नहावै
फेर नुहावै
तीन बीसी बरस जूनै
पीतळ रै ठाकुर जी नै
जकै रा नैण-नक्स
दुड़ गिया
मा रै हाथां
नहावंता-नहावंता।
मोतिया उतरयोड़ी
आंख रै सारै ल्या
ठाकुर जी रो मुंडौ ढूंढ’र
लगावै भोग
अर फेर
सगळां नै बांटै प्रसाद
जीत मांय हांफ्योड़ी सी।

मा- ४
टाबरां मांय टाबर
बडेरां मांय बडेरी
हुवै मा।
टाबरां मांय
कदै’ई
बडेरी
नीं हुवै मा।
पण
हर घर मांय
जरुर हुवै मा
रसगुल्लै मांय
रस री भांत।

7 टिप्‍पणियां:

  1. namaskar kagad saab! aap ri kavitavan ro kee jawam koni.lajawab likho ho aap.mhari badhai sweekaro.

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  2. मां रै ओळै-दोळै री ओळ्यां घणी जबरी।

    आपरी खिमता नै निंवण।


    लखदाद

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  3. aadar jog om saab ne pranam,
    puro chitram dikhan lag gayo. aachi kavita bachan ne mili en saru mokalo aabhar.

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  4. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  5. baba
    thari kavitayan bahut hi achi lagi hai jiki logan re man mai amith chap chodh deve hai

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  6. Prnaam KAgad saab..!!

    Maa Pr Likhyodi Kam Or Jiyodi Jayda In KAvitan ro Darjo Mahare liye To Bhagwat Gita Jetro Hi hai ...!!
    Kaviata Padtha Padtha ...Gulzar saad re Do Line Yaad Aayegi Saad ke ..

    " Abhi Zinda HAi Maa MEri Mujhe Kuch Bhi Nahi Hoga..."
    "Me Ghar Se Jab Niklta Hun Dua Bhi Sath Chalti HAi "

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