मंगलवार, अप्रैल 13, 2010

वर्तमान राजस्थानी कविता में एक भरोसेमंद नाम है कवि श्री ओम पुरोहितकागद । पिछले वर्ष श्री कागद के राजस्थानी में दो कविता संग्रह बोधि प्रकाशन, जयपुर से पंचलड़ी और आंख भर चितराम प्रकाशित हुए । इन दिनों आपकी कालीबंगा शीर्षक से लिखी कविताएं चर्चा में है पिछ्ले दिनों किसी कार्य के सिलसिले में कागद जी सूरतगढ़ आए थे तब उनसे कुछ बातें हुई । उनकी बातों को प्रश्नोत्तरी रूप में यहां प्रस्तुत किया जा रहा है- यह चित्र एक संयोग है और मेरा सबसे पहला सवाल यही है कि क्या आप आरंभ से ही गांधीवादी विचार-धारा के रहे हैं ? यानी जो भी बुरा है उस से दूर रहते हैं ?

4 टिप्‍पणियां:

  1. पहले तो मेरी तरफ से आपको हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें! ऐसी बात नहीं है की हर बुरे चीज़ से दूर रहते हैं पर उस चीज़ की तय तक जाते हैं और जब एहसास होता है की सच में बुरा है तब दूर रहने की ठान लेते हैं!

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  2. मैने आज ही आप कि टिपण्णी देखी, बहुत अच्छा लगा, मैने आप के ब्लांग को अपनी लिस्ट मै ले लिया है, बस दो चार दिनो मै ही मै फ़िर से ब्लांग पर आ रहा हुं,बुरे से दुर तो रहना चहिये लेकिन यह भी पता तो होना चाहिये वो बुरा केसे है.....धन्यवाद

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  3. गुरु जी कविता अच्छी लिखी है कोई प्यार कर्ण हाला ताईं भी कुछ लिखो

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