सोमवार, अप्रैल 16, 2012

एक हिन्दी कविता

कसमें निभाते गये
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वो कसमे दिलाते गये ।
हम कसमें निभाते गये ।।
दिल टूटे तो रोना क्या ।
तोड़ कर समझाते गये ।।
तमाशा था मुहब्बत नहीं ।
वो खेल कर जताते गये ।।
हैं अमानत हम किसी की ।
मुस्कुरा कर बताते गये ।।
हम रोए मूंद कर आंखें ।
वो नगमे सुनाते गये ।।

1 टिप्पणी:

  1. सोने के बाद भी चैन नसीब नहीं -

    "सपनों में आ जाते हैं ।
    यूं हमको बहलाते गए ।।"

    बहुत ही खूबसूरत गज़ल !

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