रविवार, मार्च 13, 2011

म्हारी दोय राजस्थानी कवितावां

आओ आपां बात करां

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आओ !
आपां बात करां
छोटै-छोटै मुंडां
बडी-बडी
बात करां !


ऐकर फ़ेरूं
गोरधन नै
चिटूली माथै ऊंचां
किरसन नै उडीक्यां बिन्यां
कंसां नै मारां !
महाभारत सारू
त्यार खडी़
अपघात्यां री फ़ोजां नै
धूड़ चटावां !
आओ !
आपां बात करां
छोटै-छोटै मुंडां
बडी-बडी
बात करां !


सत्ता हथियावण
बेमेळ भेळा होयोडा़
भूपत्यां नै बकारां
सत्ता री दरोपती रो
चीर हरण होवण सूं पै’ली
लाज बचावां !
आओ !
आपां बात करां
छोटै-छोटै मुंडां
बडी-बडी
बात करां !


चौपड़ माथै
पास्सा फ़ैंकतै धरमराज नै
हारण सूं पै’ली उठावां
कौरवां नै समझावां
अर
पांडवां नै पांच गांव दिरावां !
आओ !
आपां बात करां
छोटै-छोटै मुंडां
बडी-बडी
बात करां !

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आपां काईं करस्यां
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जद भैंरूं जी
सवामणी री परसादी
जीम’र भी
जे साध नी पूरी तो
आपां उण टैम काईं करस्यां ?


दारू रो
पूरो गेळण गटक
समूळो बकरियो भख
माताजी नी तूठ्या
अर
हड़मानजी री देवळी री
इक्कीस फ़ेरयां रै बाद भी
हड़मान बाबै
भूत नीं काढ्यो तो
आपां उण टैम काईं करस्यां ?


डोरा-मादळिया
अनै सात-सात झाडां रै बाद भी
मल्लू बरडा़वणो नीं छोड़्यो
देवळ्यां साम्हीं
झडू़लो उतारयां पछै भी
जे गोरियै
हकळावणों नीं छोड्यो
अर मंगळियै रै गोमदै
खोडा़वणो नी छोड्यो तो
आपां उण टैम काईं करस्यां ?


आपां रै साथै ई
देई-देवता
पित्तर-भोमियां
डाकण-स्याकण
डोरा-मादळिया
झाडा़-टूणां ई जे
आगलै सईकै पूगग्या तो
आपां उण टैम काईं करस्यां ?






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6 टिप्‍पणियां:

  1. आधी समझ मे आई, भाषा ना आने के कारण.
    बहुत सुंदर लगी आप की यह कविता.

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  2. सत्ता हथियावण
    बेमेळ भेळा होयोडा़
    भूपत्यां नै बकारां
    सत्ता री दरोपती रो
    चीर हरण होवण सूं पै’ली
    लाज बचावां !

    पूरी महाभारत का निचोड़ एक कविता में डाल दिया बहुत ही बढ़िया. दूसरी कविता भी अप्रतिम बनी है. बहुत बधाई.

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  3. आपका ब्लॉग पसंद आया....इस उम्मीद में की आगे भी ऐसे ही रचनाये पड़ने को मिलेंगी कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-
    http://vangaydinesh.blogspot.com/2011/03/blog-post_12.html

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  4. दिलचस्प और अच्छी कविताएं....,
    भाषाई दिक्कत आड़े नहीं आ रही है।
    आपको सपरिवार होली पर फागुनी शुभकामनायें..

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  5. प्रशंसनीय.........लेखन के लिए बधाई।
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    देश को नेता लोग करते हैं प्यार बहुत?
    अथवा वे वाक़ई, हैं रंगे सियार बहुत?
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    होली मुबारक़ हो। सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी

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  6. आपका ब्लॉग पसंद आया....इस उम्मीद में की आगे भी ऐसे ही रचनाये पड़ने को मिलेंगी कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-

    रंग के त्यौहार में
    सभी रंगों की हो भरमार
    ढेर सारी खुशियों से भरा हो आपका संसार
    यही दुआ है हमारी भगवान से हर बार।

    आपको और आपके परिवार को होली की खुब सारी शुभकामनाये इसी दुआ के साथ आपके व आपके परिवार के साथ सभी के लिए सुखदायक, मंगलकारी व आन्नददायक हो।

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