रविवार, अप्रैल 01, 2012

प्रीत की साख

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[<0>]प्रीत की साख[<0>]
निराशा के थेहड़ में भी
आशा की उज्ज्वल किरण
सुरक्षित है हमारे लिए
जो आ ही जाएगी
आत्मीय स्पर्श ले
हमारे सन्मुख
समय के साथ
इस लिए
मैं कर रहा हूं इंतजार
समय के पलटने का ।

समय दौड़ रहा है
आ रहा है समीप
या जा है रहा दूर
अभी तो देता नहीं
वांछित ऐहसास
आश्वस्त हूं मगर मैं
एक हो ही जाएगा
हमारे सन्मुख नतमस्तक !

इसी लिए
कहता हूं प्रिय
तुम भी करो इंतजार
बैठ कर अपने भीतर
बदलते समय का
यही आएगा
बन साक्षी
भरने प्रीत की साख !

1 टिप्पणी:

  1. "इसी लिए
    कहता हूं प्रिय
    तुम भी करो इंतजार
    बैठ कर अपने भीतर
    बदलते समय का
    यही आएगा
    बन साक्षी
    भरने प्रीत की साख !
    वाह ! भरने प्रीत की साख...अत्यंत सुंदर !

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